
नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम दीक्षित है, और मैं एक मेडिकल कंपनी में मेडिकल कंटेंट राइटर (Medical Content Writer) के तौर पर काम करता हूँ। लेकिन आज इस वेबसाइट पर इस पर्सनल ब्लॉग के जरिए मैं आप सभी से अपने जीवन का स्वास्थ्य से जुड़ा एक बहुत बड़ा अनुभव शेयर करना चाहता हूँ, ताकि वह आपके काम आ सके और मेरी तरह आपको परेशानी न झेलनी पड़े।
आज से लगभग 8 साल पहले (2019 में) जब मैं पढ़ाई के लिए अपने गाँव से दिल्ली आया तब मेरे सामने एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या आई। वो गंभीर समस्या थी पेट का साफ़ न होना। जब मैं रोज सुबह फ्रेश होने जाता था तो पेट साफ़ ही नहीं होता था। मैंने पूरे 1-1.5 साल में लगभग वो सब कुछ आजमा कर देखा जो मुझे इंटरनेट पर मिला लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मैंने रोज रात को एक गिलास गुनगुना दूध गुड़ के साथ पीना शुरू किया, (जो गाँव में मेरा रोजाना का रूटीन था) लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उसके बाद जब मैंने परेशान होकर इंटरनेट पर कहीं पढ़ा कि रात को अंजीर भिगो कर सुबह खाली पेट खाने से पेट साफ़ होता है तो मैंने वो भी कर के देखा लेकिन उससे भी कोई ख़ास फायदा नहीं हुआ।
मैं जब तक वहाँ पर रहा मुझे हमेशा कई बार फ्रेश होने जाना पड़ता था, लेकिन कई बार में थोड़ा-थोड़ा करके भी मेरा पूरा पेट साफ़ नहीं होता था। जिसकी वजह से मेरा समय तो बर्बाद होता ही था लेकिन यह काफी इरिटेटिंग भी था। यहाँ तक की हालत इतनी ख़राब हो गयी थी कि 1-2 बार तो मुझे पेट साफ़ करने के लिए दवा लेनी पड़ी थी, और क्योंकि मैं किसी भी छोटी-मोटी समस्या के लिए हमेशा से दवा को पहला विकल्प नहीं मानता हूँ, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल और आयुर्वेद में ज्यादा विश्वास करता हूँ, इस वजह से मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात थी।
खैर उसके बाद 2020 मैं जब मैं घर आया तो लॉकडाउन लग गया और घर पर रह कर मेरी ये समस्या ठीक हो गयी। लेकिन कुछ महीनों बाद मैं फिर से देहरादून गया और फिर नौकरी के लिए दिल्ली आया तो फिर से मैं इस समस्या से काफी परेशान रहा। इस दौरान मैंने काफी अलग-अलग नुस्ख़े आजमाए, जैसे रोज सुबह आँवले का जूस पीना, एलोवेरा का जूस पीना लेकिन मेरी यह समस्या कभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुई।
हालाँकि अभी भी मैं दिल्ली में ही रहता हूँ और पिछले इन 7 सालों में मैंने कई अलग-अलग एक्सपेरिमेंट्स करके कब्ज की इस गंभीर समस्या के कारणों को भी समझा और इससे लगभग पूरी तरह छुटकारा भी पाया।
लेकिन मुझे यह देखकर बहुत दुःख होता है कि आज भी मैं जब कब्ज की समस्या से छुटकारा पाने के तरीकों और कारणों को इंटरनेट पर पढता हूँ तो मुझे वही पुराने घिसे-पिटे तरीके या उपाय मिलते हैं जो या तो काम नहीं करते या करते भी हैं तो समस्या को जड़ से नहीं मिटा पाते।
इसीलिए मैंने इन 7 सालों में काफी तकलीफ और अलग-अलग प्रयोगों से गुजरते हुए अपने अनुभव से जो भी कुछ सीखा और समझा है उसे मैं आप सबके साथ साझा करना चाहता हूँ और मेरा विश्वास है कि इन अनुभवों से आप न सिर्फ इस समस्या की जड़ को पकड़ पाएंगे बल्कि इससे लगभग पूरी तरह छुटकारा (Constipation Causes and Relief in hindi) भी पा सकेंगे। आइए पहले जानते हैं कि गाँव से शहर आने पर मुझे यह समस्या आखिर हुई क्यों थी, इसके पीछे मुख्य रूप से क्या कारण थे।
गाँव से शहर आने पर कब्ज होने के मुख्य कारण:

NIDDK के अनुसार, यात्रा और रोजमर्रा की दिनचर्या या खानपान में बदलाव से कब्ज हो सकती है। मेरे मामले में भी गाँव से शहर आने के बाद खानपान और दिनचर्या काफी बदल गई थी।
नोट- ये कारण मेरे अपने प्रयोगों और अनुभव पर आधारित हैं। इतने सालों के दौरान मैंने जो कुछ जाना और समझा उसे ही मैं आप सबके साथ शेयर कर रहा हूँ।
1.पहला मुख्य कारण:-
मैं बचपन से ज्यादतर समय अपने जिला बिजनौर के गाँव में ही रहा हूँ जहाँ का पानी काफी भारी है, जिसकी एक वजह पानी में मिनरल्स की अधिकता भी है। मेरा शरीर उस पानी को पचाने के हिसाब से विकसित हुआ है। अब जब 2019 में मैं पढ़ाई के लिए दिल्ली आया तो मैंने RO का पानी पीना शुरू किया जो काफी हल्का होता है और उसमे मिनरल्स भी काफी कम या संतुलित मात्रा में होते हैं। जो मुझे लगता है कि मेरी कब्ज की समस्या का पहला मुख्य कारण बना।
2. दूसरा मुख्य कारण:-
यूँ तो गांव से दिल्ली आने पर मेरी पूरी ही डाइट चेंज हो चुकी थी। जहाँ गांव में घर के गेहूँ से बने फाइबर से भरपूर आटे की रोटी खाता था, साथ ही रात में सोने से पहले दूध भी पीता था, वहीं यहाँ आने पर मैं सुबह से दोपहर का खाना बाहर खाता था। जिसमें लोग पैकेट वाला बारीक़ पिसा हुआ आटा यूज़ करते थे। लेकिन सबसे बड़ी दूसरी मुख्य गलती जो मेरे कब्ज की वजह बनी वो थी रात के समय चावल खाना। रात को मैं अपना खाना खुद बनाता था और ज्यादातर रसीली सब्जी या दाल के साथ चावल खाता था, जो सही मायने में हमारा दोपहर का भोजन होना चाहिए।
हालाँकि मैंने लगातार अलग-अलग प्रयोग किए और घर आने पर भी यह नोटिस किया की जिस दिन मैं रात को चावल खाता हूँ, उससे अगली सुबह मेरा पेट बहुत अच्छे से साफ़ नहीं होता, तब मुझे इस बात के बारे में पता लगा और फिर कई बार मैंने यह चीज आजमा कर देखी और यह बिल्कुल सही साबित हुई।
इससे पहले मुझे गांव में रहते हुए इस बात का पता इसलिए नहीं लगा था क्योंकि हम गांव में हमेशा से ही दोपहर में चावल और रात में रोटी खाते आये थे।
हालाँकि मेरी कब्ज की समस्या के सबसे बड़े मुख्य कारण मैं इन 2 को ही मानता हूँ , लेकिन कुछ और गलतियां भी मैंने की जो कहीं न कहीं मेरी उस कब्ज की समस्या में भागीदार रही थीं। मैं नीचे उन सभी गलतियों को एक-एक करके बता रहा हूँ ताकि आप उन गलतियों से बच सकें।
मेरी कब्ज की समस्या की कुछ और संभावित गलतियाँ:

- मेरी कोचिंग वाली जगह काफी VIP थी और वहाँ खाने के सिर्फ दो ही रेस्टोरेंट थे, जो नोएडा और बाकी दिल्ली की जगहों के हिसाब से बहुत महँगा खाना देते थे। इस वजह से मेरे पास पर्याप्त पैसे होने के वावजूद मैं वहाँ खाना न खाकर अक्सर पास ही की दुकान से पेटीज वगैरह लेकर खा लेता था। जिससे मेरे भोजन में फाइबर की बहुत कमी हो गयी थी और यह मेरे कब्ज की समस्या का एक और कारण बना।
- वीकेंड पर 12 घंटे की कोचिंग क्लासेज और बाकी दिन लगातार 12 घंटे लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ने से मेरी फिजिकल एक्टिविटी काफी काम हो गयी थी। यह एक और संभावित वजह थी जिसने मेरी कब्ज की समस्या को बढ़ाने में योगदान दिया।
- हालाँकि अगर बाकी रूटीन सही रखा जाए तो रात को दूध न पीने से अपने आप में कब्ज जैसी कोई समस्या नहीं होती पर मेरी पूरी डाइट ख़राब होने के वाबजूद अगर ममैं रात को गुड़ के साथ थोड़ा शुद्ध दूध पी रहा होता तो संभव था की मेरे पेट और आँतों को थोड़ा रिलैक्स मिल पाता। हालाँकि पैकेट वाला दूध मैंने कुछ दिन पीकर देखा लेकिन उससे कुछ फायदा नहीं हुआ।
- घर से पहली बार इतने लंबे समय तक पढाई की वजह से बाहर रहने और अचानक से इतना ज्यादा पढ़ाई का स्ट्रेस लेने की वजह भी एक संभावित कारण हो सकती है।
यहाँ तक हमने लगभग उन सभी कारणों के बारे में जान लिया जो मेरी कब्ज की गंभीर समस्या की वजह बने। आइए अब विस्तार मैं आपको वो सब बताता हूँ जो मैंने इतने सालों में सीखा और इस समस्या से लगभग पूरी तरह छुटकारा पाया। मेरा ऐसा पूरा विश्वास है ये सभी समाधान और बदलाव अगर आप अपने लाइफस्टाइल मैं कर पाएं जो मैं बताने जा रहा हूँ तो आपकी कब्ज की समस्या काफी हद तक ठीक हो सकती है।
कब्ज की समस्या के समाधान:

मैं अपने अनुभव के आधार पर एक-एक करके यहां उन सब चीजों को एक्सप्लेन कर रहा हूँ, जो आपको कब्ज की समस्या से छुटकारा पाने में मदद करेंगी, इनमें से जितनी भी चीज़ें आप अपने रूटीन में फॉलो कर पाएं उतना ही अधिक आपको फायदा हो सकता है। पहले हम उन चीजों के बारे में बात करते हैं जो आपको कब्ज से छुटकारा पाने के लिए करनी बेहद जरुरी हैं, उसके बाद डिटेल में कुछ और ऐसे कामों या बदलावों के बारे में बाद करेंगे जिन्हें अगर आप अपने रूटीन में शामिल करेंगे तो आपको अतिरिक्त फायदा मिलेगा।
जरुरी बदलाव:
1. रात को चावल/फ़ास्ट फ़ूड/ मैदा से बनी चीज़ें न खाना:
सबसे पहली और सबसे जरुरी चीज जो आपको करनी है, वो है रात को चावल न खाना। चावल को आप दोपहर में खाइए। साथ ही कब्ज की समस्या से बचने के लिए रात के समय फ़ास्ट फ़ूड, जंक फ़ूड, या मैदा से बनी चीज़ें नहीं खानी चाहिए। हालांकि मुझे तो लगता है कि ये सब चीज़ें रोजाना तो दिन में भी नहीं खानी चाहिए, पर अगर आप खाते हैं तो हफ्ते में कभी एक या दो बार खा सकते हैं। वैसे तो मेरे अनुसार फ़ास्ट फ़ूड और मैदा से बनी चीजें दिन में खाने पर भी पेट साफ़ होने में रुकावट डालती हैं, लेकिन रात को खाने से इनका हमारे पेट और बाकी स्वास्थ्य पर काफी नकारात्मक असर पड़ता है।
एक तो इन चीजों में फाइबर बहुत कम या न के बराबर होता है और दूसरा ये बहुत धीरे- धीरे पचती हैं, दिन में खाने पर तो फिर भी इन्हें पचाने के लिए पेट को पर्याप्त समय मिल जाता है, और दिन में आप थोड़ी फिजिकल एक्टिविटी भी करते हैं, इसलिए अगर आप खाते हैं तो रात के मुकाबले फ़ास्ट फ़ूड और मैदे से बनी चीजों को दिन में खाना बेहतर है। अगर मैं अपने अनुभव के आधार पर बात करूँ तो रात के समय सब्जी के साथ गेहूँ या मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटी बेस्ट है।
2. रात में बहुत ज्यादा पेट भरकर न खाना:
रात के समय आप जितना हल्का खाना खाएंगे उतना ही जल्दी पचेगा और सुबह शरीर भी हल्का महसूस होगा। मेरे हिसाब से तो इतना खाना-खाना चाहिये जिससे आपकी भूख शांत हो जाए न की पेट भर जाए। साथ ही अगर आप गेहूँ या मल्टीग्रेन आटे की रोटी खाएंगे तो आपको जल्दी भूख भी नहीं लगेगी। इसके अलावा खाना खाने के बाद कम से कम 10 मिनट टहलना भी मुझे काफी फायदेमंद दिखाई दिया।
3. डिनर के बाद 15 मिनट वज्रासन में बैठना:
जहां तक मुझे पता है वज्रासन अकेला एक ऐसा आसन है जिसे आप खाना खाने के तुरंत बाद कर सकते हैं। हालाँकि वज्रासन के और भी कई अद्भुत फायदे हैं, लेकिन एक सबसे जबरदस्त फायदा जो मुझे दिखाई दिया वो ये कि खाना-खाने के बाद 15 मिनट वज्रासन में बैठने के बाद शरीर काफी हल्का महसूस होता है, ऐसा लगता है जैसे खाना काफी हद तक पच गया हो।
डिनर के बाद 15 मिनट तक वज्रासन में बैठना तो अब मेरी आदत हो चुकी है, और इससे मुझे तो काफी फायदा लगता है। इसका असर और फायदा आपको तुरंत दिखाई दे सकता है, यहाँ तक की मैं तो कहूँगा कि अगर किसी दिन आपने पार्टी या किसी और वजह से बहुत हैवी खाना खा लिया हो और उसके बाद 15 से 20 मिनट तक आप वज्रासन में बैठ जाएँ तो आपको तुरंत फयदा दिखाई देगा। शरीर हल्का और खाना पचा हुआ महसूस होगा, सुबह भी शरीर हल्का महसूस होगा।
लेकिन आपको शरुआत में ही 15 मिनट वज्रासन में नहीं बैठना चाहिये, पहले दिन 2 या 3 मिनट से शुरू करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। अगर आपको पैरों या घुटनों की कोई समस्या है तो वज्रासन करने से पहले डॉक्टर सलाह लें।
4. सुबह गुनगुना पानी और वज्रासन:

यह एक ऐसा काम है जिससे मुझे सबसे ज्यादा मिला, और अगर आप पूरा पेट साफ़ करना चाहते हैं तो यह करना आपके लिए बेहद जरुरी है। सुबह उठकर आप एक पैन भरकर (2-3 गिलास) पानी गुनगुना कर लें और पेट भरकर पिएं। पानी इतना गुनगुना हो की आपको थोड़ा गर्म महसूस होना चाहिए। इतना तेज भी न हो की आपको सिप-सिप करके पीना पड़े। फिर बड़े-बड़े घूँट भरकर पेट भरने तक पानी पिएं और उसके बाद 10-15 वज्रासन में बैठ जाएँ।
आप चाहें तो वज्रासन में बैठकर भी पानी पी सकते हैं , लेकिन ध्यान रहे वज्रासन में बैठकर न तो आपको फ़ोन देखना है और न ही टी-वी और न किसी से बात करनी है। आपका ध्यान सिर्फ आपके शरीर पर होना चाहिए। आप नोटिस करेंगे कि 15 मिनट पूरी होनी से पहले से ही आपको प्रेशर महसूस होगा, प्रेशर आने पर पैरों को धीरे- धीरे खोलकर उठें और फ्रेश होने जाएँ। आप महसूस करेंगे कि आपका पेट पहले से ज्यादा अच्छे से और जल्दी साफ़ हुआ है।
एक और जरुरी बात, अगर आपके घर में भारतीय स्टाइल वाली टॉयलेट है तो बहुत ज्यादा बेहतर है, क्योंकि अपने और कुछ दूसरे लोगों के अनुभव के आधार पर मैंने यह देखा है कि इंडियन स्टाइलिश टॉयलेट पर पेट ज्यादा जल्दी और अच्छे से साफ़ होता है।
ऊपर बताई गई ये 4 चीज़ें ऐसी हैं जो आपको फॉलो करनी जरुरी हैं। हालाँकि वज्रासन में 15 मिनट तक बैठने में आपको कुछ दिन का समय लगेगा। लेकिन इन चीजों को रूटीन में शमिल करके आप देखेंगे कि आपको काफी फायदा महसूस हुआ। हालाँकि अभी जिन चीजों के बारे में बातें करने जा रहे हैं वो भी अगर आप कर पाएं तो बहुत अच्छा है क्योंकि इनमें से हर चीज का अपना एक फायदा है। आप अपनी समस्या की गंभीरता और परिस्थिति के आधार पर फैसला लें।
5 . रोज सुबह व्ययाम :
यह एक और चीज है जिससे मुझे फायदा लगा रोज सुबह फ्रेश होने के बाद थोड़ी रनिंग और उसके बाद थोड़ा व्यायाम, आप चाहे तो इनमें से कोई एक चीज भी कर सकते हैं। अगर आपको सुबह समय नहीं लगता तो आप शाम के समय भी व्यायाम/रनिंग कर सकते हैं। या अगर आपको कोई खेल ( बैडमिंटन, फुटबॉल या बॉलीबाल) पसंद है तो आप उसे भी अपने रूटीन में शामिल कर सकते हैं।
6. भीगे हुए छुहारे व मुनक्का:

हालाँकि मुझे यकीन है, कि इतना सब करने पर आपकी कब्ज की समस्या काफी हद तक ठीक हो चुकी होगी लेकिन फिर भी अगर आप रात को 2-3 छुहारे व 7-8 काली मुनक्का एक छोटे गिलास पानी में भिगो दें, और सुबह फ्रेश होने के बाद या व्यायाम करने के कुछ देर बाद खा लें और पानी भी पी लें ,तो यह आपकी कब्ज की समस्या के साथ- साथ और कई तरीकों से भी फायदेमंद हो सकता है।
आप चाहें तो छुहारे व काली मुनक्का की जगह चिया सीड्स, या अंजीर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। हालाँकि मैं तो आम तौर पर छुहारे और मुन्नका ही इस्तेमाल हूँ।
7. फाइबर की मात्रा बढ़ाएं:

डाइट में फाइबरयुक्त चीज़ें शामिल करने से मल भारी होता है और आँतों में आसानी से आगे बढ़ता है। जिससे पेट साफ़ होने में मदद मिलती है। आप चाहें तो फाइबर के लिए अपनी डाइट में फल, सलाद और सीड्स जैसे हेल्दी विकल्प जोड़ सकते हैं।
8. रात को दूध पीना:
हालाँकि यह जरुरी नहीं है, लेकिन अगर आप रात को सोने से लगभग आधा घंटा पहले एक गिलास गुनगुना दूध गुड़ के साथ पी सकते हैं तो पेट साफ़ होने में मदद मिल सकती है। साथ ही कैल्शियम और दूसरे सम्बंधित फायदे भी मिल सकते हैं।
लेकिन ध्यान रखें अगर आप रात को दूध पीते हैं, तो डिनर हल्का करें और डिनर एवं दूध के बीच कम से कम 1 घंटे या उससे ज्यादा का गैप रखना अच्छा है। स्वास्थ् की दृष्टि से आयुर्वेद में गाय के दूध को हल्का, सुपाच्य और औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है।
9. डिनर जल्दी करें:
वैसे तो हम बुजुर्गों से हमेशा से सुनते आए हैं कि शाम का खाना सूर्यास्त से पहले खा लेना अच्छा है, और सूर्यास्त के बाद आप सिर्फ दूध पी सकते हैं, लेकिन आज के लाइफस्टाइल के हिसाब से खासकर शहरों में यह रूटीन फॉलो कर पाना लगभग असंभव सा हो गया है। इसलिए डिनर आपको अपनी सुविधा के अनुसार जितनी जल्दी उपलब्ध हो सके उतना अच्छा लेकिन अगर देर भी हो जाए तो, कोशिश करें कि डिनर और सोने के बीच कम से कम 2 घंटे का गैप तो रखें ही, और वज्रासन भी जरूर करें।
कुछ जरुरी टिप्स:
- रात को सोने से पहले ब्रश करें ताकि रात भर भोजन के कण मुहँ में न सड़ें और सुबह गुनगुना पानी पीने पर पेट में न जाएँ।
- सुबह गुनगुना पानी पीने से रात भर की मुँह में जमी हुयी बासी लार पेट में जाना भी फायदेमंद बताई जाती है।
- पूरे फायदे के लिए वज्रासन में बैठकर स्क्रीन न देखें, इसके बजाए अपने शरीर पर ध्यान लगाएं या खुद को थोड़ा रेस्ट दें, जो आपके मानसिक और शरीरिक दोनों स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।
- पहले दिन से ही वज्रासन में 15 मिनट बैठने की कोशिश न करें, 2-3 मिनट से शुरू करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। अगर आपको घुटनों या पैरों की कोई समस्या है तो वज्रासन से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
- फ्रेश होते समय टॉयलेट में फोन न चलाएं और न ही बात करें। मेरे अपने अनुभव के अनुसार कोई भी काम करते समय आप मानसिक रूप से उसमें कितने शामिल हैं , इसका प्रभाव भी उसके परिणाम पर पड़ता है। इसी तरह खाते समय भी सिर्फ खाने पर ही ध्यान दें।
- अगर आपके घर में उपलब्ध है और आपको पैरों या घुटनों में कोई समस्या नहीं है तो इंडियन स्टाइल टॉयलेट को प्राथमिकता दें।
- डिनर के बाद कुछ देर (कम से कम 10 मिनट) टहलना और उसके बाद वज्रासन में बैठने से आपको टहलने के अतिरिक्त फायदे मिल सकते हैं, लेकिन आप चाहें तो खाने के तुरंत बाद वज्रासन में भी बैठ सकते हैं।
निष्कर्ष:

आजकल ज्यादातर जब लोग पढाई, नौकरी या किसी काम के लिए जब गाँव से शहरों में शिफ्ट होते हैं तो उनके खान-पान, हवा पानी से लेकर पूरा रूटीन ही बदल जाता है, ऐसे में जो लोग बहुत ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी वाला काम करते हैं, वो तो मैनेज कर लेते हैं लेकिन जिनका उतना फिजिकल एक्टिविटी वाला काम नहीं होता या जिनका पेट थोड़ा सेंसिटिव होता है उन्हें पेट से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बड़े बुजुर्ग और वैद्य हमेशा से कहते आए हैं कि ज्यादातर समस्याएं पहले पेट से ही जन्म लेती हैं, इसलिए पेट का स्वस्थ रहना बहुत जरुरी है।
मैं नहीं चाहता कि गांव से शहर आने पर जिन स्वास्थ्य का सामना मुझे करना पड़ा और मैं इतने सालों तक परेशान रहा, उन्हीं परेशानियों का किसी और को भी सामना करना पड़े, इसीलिए इतने सालों के अनुभव से जो मैं समाधान निकाल पाया उन्हें आपके साथ साझा करना मेरे लिए बहुत जरुरी था, ताकि मेरा यह अनुभव आपके काम आ सके और आप इन समस्याओं से शुरू से ही बच पाएँ व अपना पूरा ध्यान और ऊर्जा अपने काम पर लगा पाएँ। इस उद्देश्य से ही मैंने यह ब्लॉग लिखा और मैं कोशिश करूंगा कि मैं, मेरे माता-पिता परिवार या परिचित अगर अपने अनुभवों से किसी समस्या और समाधान के बारे में विस्तार से चर्चा कर पाएँ जो कारगर भी हो, तो उसे भी मैं आप सब लोगों तक पहुँचा सकूँ।
ध्यान दें- यह पूरी जानकारी मेरे अपने कई साल के अनुभवों पर आधारित है। अगर आप किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, कोई दवा ले रहे हैं या आपका शरीर बहुत संवेदनशील है तो कुछ भी नया आजमाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
हालाँकि मैंने अपनी ओर से अपने सभी अनुभवों और जानकारी के आधार पर हर बात को बिल्कुल ईमानदारी से आपके साथ साझा किया है, लेकिन हम सभी का शरीर अलग होता है और किसी भी ऐसी जानकारी को जिसमें आपको थोड़ी सी भी उलझन हो, खुद से वेरिफाई करना हमेशा बेहतर है।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई सलाह (जैसे रात को ब्रश करना, सुबह गुनगुना पानी पीना और वज्रासन में बैठना) पूरी तरह से मेरे व्यक्तिगत अनुभव और एक्सपेरिमेंट्स पर आधारित है। मैं कोई सर्टिफाइड डॉक्टर या मेडिकल एक्सपर्ट नहीं हूँ। हर व्यक्ति का शरीर और उसकी ज़रूरतें अलग होती हैं। कृपया इस जानकारी को पेशेवर चिकित्सा सलाह (Professional Medical Advice) का विकल्प न मानें। किसी भी नुस्खे को आजमाने से पहले या यदि आपको कोई शंका हो, तो अपने डॉक्टर से परामर्श ज़रूर करें।